मंगल ग्रह पर मानव जीवन की तलाश scientist लम्बी अवधि से कर रहे हैं, अभी तक इस में किसीको किसी तरह की कोई खास सफलता नहीं मिली है। इन् सब के बीच एक ऐसी चौकाने वाली खबर सामने आयी है जिसने वैज्ञानिकों की मुश्किल बढ़ा दी है।


NASA के मंगल ग्रह के नए मिशन को लेकर scientist का कहना है कि इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती मंगल ग्रह पर प्राचीन काल के सूक्ष्म जीवों के अवशेषों के संबंध में प्रमाण जुटाना होगा। लाल ग्रह मंगल की चट्टान को पहली बार पृथ्वी पर लाकर किसी पुराने जीवन के प्रमाण की जांच के लिए उसका विश्लेषण करने के वास्ते NASA ने अब तक का सबसे बड़ा और जटिल रोवर बृहस्पतिवार को प्रक्षेपित किया।

NASA का ”परसेवरेंस” रोवर मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर पर जाकर जीवन की संभावना की तलाश करेगा। लंबे अवधि तक चलने वाली इस महत्वाकांक्षी मिशन के तहत कार के आकार का रोवर बनाया गया है जो कैमरा, माइक्रोफोन, ड्रिल और लेजर से युक्त है। विश्वास है कि रोवर 7 महीने और 48 करोड़ किलोमीटर की लम्बी दुरी तय करने के बाद अगले साल यानि 2021 की 18 फरवरी तक मंगल ग्रह पर पहुंच जाएगा। और करीब 10 साल यानि, 2031 में पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा।

इंडिया के गुजरात की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला में ग्रह scientist द्विजेश राय ने कहा कि उनके मुताबिक, परसेवरेंस रोवर मिशन का सबसे उपयोगि हिस्सा है। वह वैज्ञानिक विश्लेषण है जोकि मंगल ग्रह पर पहले सूक्ष्म जीवों की उपस्थिति के परीक्षण के लिए किया जाएगा। क्योंकि इससे की चोकने वाली जानकारी सामने आ सकती हैं।

NASA प्रशासक जिम ब्रिडेन्स्टाइन ने कहा, ‘‘ हमें नहीं पता की वहां जीवन शक्य है या नहीं। लेकिन हम यह जानते हैं कि इतिहास में एक समय ऐसा था जब मंगल ग्रह रहने लायक थी।’’ केवल यूएसए मंगल ग्रह तक अपना अंतरिक्षयान सफलतापूर्व पहुंचा पाया है। वह 1976 में vikings से शुरुआत करके आठ बार ऐसा कर चुका है। NASA के इनसाइट और उत्सुकता इस समय मंगल ग्रह पर हैं। छह अन्य अंतरिक्ष यान केंद्र से ग्रह का अध्ययन कर रहे हैं। जिस तरह से लाल ग्रह में मानव जीवन की खोज में कई सारे देश लग गये हैं। उससे ऐसा विश्वास कीया जा रहा है कि, कई सारी जानकारियां  मिल सकती हैं।