ग्रीन सिटी सूरत के पीपी सावनी चैतन्य विद्या संकुल में पढ़ाई करने वाली 14 साल की छ्हात्रा वैदेही वेकारिया और राधिका
लखानी ने यह खोज की है। दोनों ने अवकाश में रिसर्च के लिए नासा से संबद्ध ऑल
इंडिया ऐस्टरॉइड सर्च कैम्पेन (AIASC)
का हिस्सा रहने के
दौरान स्टडी में इस ऐस्टरॉइड को ढूंढ़ निकाला।
विज्ञान
कार्यक्रम किस बारे में था? यह कार्यक्रम अंतरिक्ष
भारत ने अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय खोज सहयोग (IASC) और टेक्सास के हार्डिन सीमन्स विश्वविद्यालय
के साथ मिलकर संचालित किया था, इस दो महीने के कार्यक्रम में काफी छ्हत्रो ने हिस्सा लिया था जिसमें ये दो लड़किया भी थी। छात्रों ने हवाई में पान स्टार के उन्नत टेलीस्कोप का
उपयोग किया, जिसमें उच्च कक्शा कर सीसीडी कैमरे होते है, और उनकी क्षुद्रग्रह खोज के लिए एक उच्च
क्षेत्र है।अंतरिक्ष भारत ने खोज के बारे में लोगों को सूचित करने के लिए शुक्रवार
को फेसबुक पर "खोज चेतावनी" जारी किया। जिसमे लिखा हुआ था-
"हमें यह
घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि स्पैस-ऑल इंडिया क्षुद्रग्रह खोज अभियान की मदद
से सूरत की दो लड़कियों ने एक नए क्षुद्रग्रह की खोज की, जो एक
निकट-पृथ्वी वस्तु है," यह कहा।
"यह एक
निकट-पृथ्वी वस्तु (NEO) है जो वर्तमान में मंगल ग्रह के पास है, और समय के साथ (~ 10 ^ 6 वर्ष) एक
पृथ्वी-पार क्षुद्रग्रह में विकसित होगा," पोस्ट ने क्षुद्रग्रह HLV2514 के बारे
में कहा।
सूरत में हाईस्कूल में पढ़ने वाली दो छात्रा ने अवकाश में अस्तेरोइद् (Asteroid) की खोज की
है। अमेरिकी कंपनी नासा ने इस खोज
की पुष्टि करते हुए इस नए ऐस्टरॉइड का नामकरण भी HLV2514 कर दिया। सूरत के पीपी सावनी चैतन्य विद्या संकुल में पढ़ने वाली 14 साल की लड़किया वैद्र्हि वेकारिया और राधिका लखानी ने यह
खोज की है। दोनों ने अवकाश में स्टडी के लिए नासा से संबद्ध ऑल इंडिया
ऐस्टरॉइड सर्च कैम्पेन (AIASC) का हिस्सा रहने के दौरान
स्टडी में इस ऐस्टरॉइड को खोज निकाला।
दोनों स्टूडेंट्स ने ऐस्ट्रॉनामिकल पढ़ाई की ट्रेनिंग SPACE इंस्टिट्यूट में ली थी। नासा ने ई-मेल भेजकर खोज की पुष्टि
भी की। इंट्सिट्यूट को भेजे मेल में IASC के निदेशक डॉक्टर पैट्रिक मिलर ने बताया, 'पिछले कैम्पेन में आपने HLV2514 नए
ऐस्टरॉइड का रिपोर्ट किया था। अभी यह मंगल ग्रह के नजदीक है। कुछ दिनों में ही यह
पृथ्वी को भी क्रॉस कर सकता है। बधाई।'
वैदेही का परिवार भावनगर जिले में रहता है, जबकि राधिका अमरेली जिले से है। दोनों ने अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया, 'हमने स्पेस में करीब 20 ऑब्जेक्ट्स को ढूंढा था, जिसमें से यह एक लकी निकला। हमने इसे एक रैंडम नाम दिया है
और नासा की तरफ से ऑर्बिट पूरा हो जाने पर हमें इस ऐस्टरॉइड का नाम भी रखने को
मिलेगा। इसमें कुछ साल का वक्त लग सकता है।'
SPACE के एजुकेटर आकाश द्विवेदी ने बताया, 'गुजरात में पहली बार और देश में चार साल के बाद किसी
ऐस्टरॉइड की खोज की गई है।' कोरोना के कप्रित् काल में इस प्रोग्राम में
हिस्सा लेकर सीखने की पूरी प्रक्रिया घर से हुई।
ग्रीन सिटी सूरत के पीपी सावनी चैतन्य विद्या संकुल में पढ़ाई करने वाली 14 साल की छ्हात्रा वैदेही वेकारिया और राधिका
लखानी ने यह खोज की है। दोनों ने अवकाश में रिसर्च के लिए नासा से संबद्ध ऑल
इंडिया ऐस्टरॉइड सर्च कैम्पेन (AIASC)
का हिस्सा रहने के
दौरान स्टडी में इस ऐस्टरॉइड को ढूंढ़ निकाला।
विज्ञान
कार्यक्रम किस बारे में था?
यह कार्यक्रम अंतरिक्ष
भारत ने अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय खोज सहयोग (IASC) और टेक्सास के हार्डिन सीमन्स विश्वविद्यालय
के साथ मिलकर संचालित किया था, इस दो महीने के कार्यक्रम में काफी छ्हत्रो ने हिस्सा लिया था जिसमें ये दो लड़किया भी थी। छात्रों ने हवाई में पान स्टार के उन्नत टेलीस्कोप का
उपयोग किया, जिसमें उच्च कक्शा कर सीसीडी कैमरे होते है, और उनकी क्षुद्रग्रह खोज के लिए एक उच्च
क्षेत्र है।अंतरिक्ष भारत ने खोज के बारे में लोगों को सूचित करने के लिए शुक्रवार
को फेसबुक पर "खोज चेतावनी" जारी किया। जिसमे लिखा हुआ था-
"हमें यह
घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि स्पैस-ऑल इंडिया क्षुद्रग्रह खोज अभियान की मदद
से सूरत की दो लड़कियों ने एक नए क्षुद्रग्रह की खोज की, जो एक
निकट-पृथ्वी वस्तु है," यह कहा।
"यह एक
निकट-पृथ्वी वस्तु (NEO) है जो वर्तमान में मंगल ग्रह के पास है, और समय के साथ (~ 10 ^ 6 वर्ष) एक
पृथ्वी-पार क्षुद्रग्रह में विकसित होगा," पोस्ट ने क्षुद्रग्रह HLV2514 के बारे
में कहा।
सूरत में हाईस्कूल में पढ़ने वाली दो छात्रा ने अवकाश में अस्तेरोइद् (Asteroid) की खोज की
है। अमेरिकी कंपनी नासा ने इस खोज
की पुष्टि करते हुए इस नए ऐस्टरॉइड का नामकरण भी HLV2514 कर दिया। सूरत के पीपी सावनी चैतन्य विद्या संकुल में पढ़ने वाली 14 साल की लड़किया वैद्र्हि वेकारिया और राधिका लखानी ने यह
खोज की है। दोनों ने अवकाश में स्टडी के लिए नासा से संबद्ध ऑल इंडिया
ऐस्टरॉइड सर्च कैम्पेन (AIASC) का हिस्सा रहने के दौरान
स्टडी में इस ऐस्टरॉइड को खोज निकाला।
दोनों स्टूडेंट्स ने ऐस्ट्रॉनामिकल पढ़ाई की ट्रेनिंग SPACE इंस्टिट्यूट में ली थी। नासा ने ई-मेल भेजकर खोज की पुष्टि
भी की। इंट्सिट्यूट को भेजे मेल में IASC के निदेशक डॉक्टर पैट्रिक मिलर ने बताया, 'पिछले कैम्पेन में आपने HLV2514 नए
ऐस्टरॉइड का रिपोर्ट किया था। अभी यह मंगल ग्रह के नजदीक है। कुछ दिनों में ही यह
पृथ्वी को भी क्रॉस कर सकता है। बधाई।'
वैदेही का परिवार भावनगर जिले में रहता है, जबकि राधिका अमरेली जिले से है। दोनों ने अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया, 'हमने स्पेस में करीब 20 ऑब्जेक्ट्स को ढूंढा था, जिसमें से यह एक लकी निकला। हमने इसे एक रैंडम नाम दिया है
और नासा की तरफ से ऑर्बिट पूरा हो जाने पर हमें इस ऐस्टरॉइड का नाम भी रखने को
मिलेगा। इसमें कुछ साल का वक्त लग सकता है।'
SPACE के एजुकेटर आकाश द्विवेदी ने बताया, 'गुजरात में पहली बार और देश में चार साल के बाद किसी
ऐस्टरॉइड की खोज की गई है।' कोरोना के कप्रित् काल में इस प्रोग्राम में
हिस्सा लेकर सीखने की पूरी प्रक्रिया घर से हुई।

0 Comments